गुरुवार, 1 अक्तूबर 2015

माँ - ग़ज़ल---ड़ा श्याम गुप्त

माँ का वंदन..श्राद्ध पर्व पर ---ग़ज़ल---ड़ा श्याम गुप्त

                              
श्राद्ध पर्व पर ---
Drshyam Gupta's photo.
माँ का वंदन..
फिर आज माँ की याद आई सुबह सुबह |
शीतल पवन सी घर में आयी सुबह सुबह |

वो लोरियां, वो मस्तियाँ, वो खेलना खाना,
ममता की छाँह की सुरभि छाई सुबह सुबह |

वो चाय दूध नाश्ता जबरन ही खिलाना,
माँ अन्नपूर्णा सी छवि भाई सुबह सुबह |

परिवार के सब दर्दो-दुःख खुद पर ही उठाये,
कदमों में ज़न्नत जैसे सिमट आयी सुबह सुबह |

अब श्याम क्या कहें माँ औ ममता की कहानी,
कायनात सारी कर रही वंदन सुबह सुबह ||

2 टिप्‍पणियां:

राजेंद्र कुमार ने कहा…


आपकी यह उत्कृष्ट प्रस्तुति कल शुक्रवार (02.10.2015) को "दूसरों की खुशी में खुश होना "(चर्चा अंक-2116) पर लिंक की गयी है, कृपया पधारें और अपने विचारों से अवगत करायें, चर्चा मंच पर आपका स्वागत है।
हार्दिक शुभकामनाओं के साथ, सादर...!

राजेंद्र कुमार ने कहा…


आपकी यह उत्कृष्ट प्रस्तुति कल शुक्रवार (02.10.2015) को "दूसरों की खुशी में खुश होना "(चर्चा अंक-2116) पर लिंक की गयी है, कृपया पधारें और अपने विचारों से अवगत करायें, चर्चा मंच पर आपका स्वागत है।
हार्दिक शुभकामनाओं के साथ, सादर...!