बुधवार, 7 जनवरी 2015

''औरत के ज़िस्म पर ही टिक जाती हैं निगाहें''

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औरत के ज़िस्म पर ही ;
टिक जाती हैं निगाहें ,
कितना ढके वो खुद को ;
ये मर्द ही बताये !!
...................................
रख खुद को ढक-छिपाकर ,
क्या बावरी हुई है !
जिसने उघाड़ा खुद को ;
बदनाम वो हुई है ,
जिसकी लुटी है अस्मत;
इल्ज़ाम वो ही पाये !
कितना ढके वो खुद को ;
ये मर्द ही बताये !!
............................................
है 'नेक ' वही औरत ;
पर्दे में जो है रहती ,
बेपर्दगी को दुनिया ;
बेहयाई   कहती ,
हर माँ से उसकी बेटी ,
ये ही सुने-सुनाये !
कितना ढके वो खुद को ;
ये मर्द ही बताये !!
......................................
इस जिस्म के अलावा ;
तेरा वज़ूद क्या है ?
बस इसकी कर हिफाज़त ;
मर्द की सलाह है ,
दिन-रात डरे औरत ;
नापाक न हो जाये !
कितना ढके वो खुद को ;
ये मर्द ही बताये !!
...............................
सदियों से रखा खुद को ;
औरत ने है छिपाकर ,
मक्कार मर्द खुश है ;
कठपुतलियां बनाकर ,
ऊँगली के इशारों पर
औरत को है नचाये !
कितना ढके वो खुद को ;
ये मर्द ही बताये !!


शिखा कौशिक 'नूतन'


5 टिप्‍पणियां:

Vadhiya Natha ने कहा…

Thank you sir. Its really nice and I am enjoing to read your blog. I am a regular visitor of your blog.
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Shalini Kaushik ने कहा…

really this is the reality of indian social view. nice presentation of expression of indian woman .

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ऋषभ शुक्ला ने कहा…

sundar aur umda rachna..........

http://kahaniyadilse.blogspot.in/
http://hindikavitamanch.blogspot.in/

shyam Gupta ने कहा…

नहीं ऐसा नहीं है ..यह भारतीय नारी व समाज की तस्वीर नहीं है ...यह वास्तविकता से दूर तथ्य है.....
----- अनपढ़, अशिक्षित, अविवेकी एवं आपराधिक पृष्ठभूमि व सोच वाले लोगों में ही यह होता है ....लोगों