रविवार, 8 सितंबर 2013

प्रेम बुद्धि बल पाय, मूर्ख रविकर क्यूँ माता -

पर मेरी प्रस्तुति 

माता निर्माता निपुण, गुणवंती निष्काम ।
सृजन-कार्य कर्तव्य सम, सदा काम से काम ।

सदा काम से काम, पिंड को रक्त दुग्ध से । 
सींचे सुबहो-शाम, देवता दिखे मुग्ध से । 

देती दोष मिटाय, सकल जग शीश नवाता । 


प्रेम बुद्धि बल पाय,  मूर्ख रविकर क्यूँ माता  ??


तुमने कुछ कहा था?

तुमने कुछ कहा था?
शायद मैंने ही नहीं सुना होगा,
वक़्त के साथ - साथ थोडा बदल सा गया हूँ मैं,
तुम्हे नहीं लगता क्या ऐसा?
चलो अच्छा है फिर,
कम से कम ठंढी हो चुकी कॉफ़ी के साथ,
सिगरेट फूंकता हुआ मैं तुम्हे अभी भी अच्छा लगता हूँ,
देखो न, इन पके बालों और चहरे पर उभरती झुर्रियों में,
कितना वक़्त गुजर गया,
बस भागे जा रहे हैं हम,
मैं ठहरना चाहता हूँ,
लेकिन तुम ठहरने ही नहीं देती,
हम जैसे कल थे वैसे ही आज भी हैं,
समय से भागते हुए,
लेकिन तनहाई फिर भी नहीं मिली,
तुम्हे मिली क्या?
जिस दिन भी मिले बताना जरूर,
अपनी तन्हाई से मैं चुपके से पूछ लूँगा,
क्यूँ होता है इतना कुछ,
जब कुछ भी नहीं होना होता ?

-नीरज

पंचायत ने किशोरी की इज्जत की कीमत लगाई 50 हजार रुपए


पंचायत ने किशोरी की इज्जत की कीमत लगाई 50 हजार रुपए

merrut gang rape victim
अमर उजाला, मेरठ से साभार 

उत्तर प्रदेश में मेरठ के करनावल में शुक्रवार को तीन युवकों ने घर में काम करने वाली 15 साल की नौकरानी से सामूहिक दुष्कर्म किया। इसको लेकर बैठी पंचायत में पुलिस की मौजूदगी में किशोरी की अस्मत की कीमत 50 हजार रुपये लगा दी।

इतना ही नहीं आननफानन में जबरन किशोरी के परिजनों को 50 हजार रुपये सौंप दिए गए।

सूत्रों के अनुसार करनावल की एक किशोरी कस्बे के ही एक घर में काम करती थी। रोजाना की तरह शुक्रवार सुबह भी वह काम करने गई तो तीन युवकों ने उसके साथ सामूहिक दुष्कर्म किया और फरार हो गए।

आरोप है कि आरोपियों ने किशोरी के परिजनों को कार्रवाई न कराने के लिए धमकी भी दी। सूचना पर पहुंचे परिजन किशोरी को बदहवास हालत में घर ले गए। इस बीच इंस्पेक्टर भी मय फोर्स गांव पहुंच गए और मामले की जानकारी ली लेकिन कुछ लोग मामले को दबाने में जुट गए।

मामले को लेकर रात में पंचायत बैठ, जिसमें दोनों पक्षों के अलावा पुलिस भी शामिल हुई।

आरोप है कि पुलिस की मौजूदगी में ही किशोरी की अस्मत की कीमत 50 हजार रुपये लगाकर फैसला करा दिया गया। पीड़ित पक्ष का आरोप है कि पुलिस ने सांठगांठ फैसले के लिए दबाव बनाया।


प्रस्तुतकर्ता -शिखा कौशिक 'नूतन '

गुरुवार, 5 सितंबर 2013

अब दिल को मांजा जाये -लघु कथा

अब दिल को मांजा जाये -लघु कथा 
'संगीता  ये क्या  कर  रही  है ? अपना  गिलास क्यों दिया तूने ?अब घर  जाकर रख से मंजवाना ...जानती नहीं ये रेशमा मुसलमान है .....माँस  खाते हैं ये ....मुझे  तो उबकाई आती है इनसे बात करते हुए ..इनके पास बैठते हुए ..''सुषमा ने नौवी  कक्षा  के  एक कोने में ले जाकर संगीता से ये सब कहा तो संगीता सुषमा के कंधें पर हाथ रखते हुए बोली -'' सुषमा जानती हो ना रेशमा की तबियत कितनी ख़राब थी यदि मैं तुरंत अपने गिलास में पानी कर के उसे न पिलाती तो उसकी तबियत और ख़राब हो सकती थी .  जहाँ तक  बात राख से मंजवाने की तो बर्तन हमारे घर में सभी अच्छी तरह धोये जाते हैं ,झूठे बर्तन में कोई नहीं खाता पीता हमारे यहाँ ...अब चाहे ये तुम्हारा झूठा हो या रेशमा का . ये ठीक  है  कि तुम शाकाहारी  हो और रेशमा मांसाहारी पर इसमें   हिन्दू-मुसलमान का अंतर नहीं अब तो कितने ही हिन्दू -जैन समुदाय के लोग माँसाहार करते हैं .रही बात तुम्हे उबकाई आने की तो मेमसाब दिल पक्का कर लो साइंस की क्लास  में कल को मानव-शरीर के बारे में पढाया जायेगा .''   ये कहकर संगीता हँसी और सुषमा लज्जित सी होकर  इधर -उधर  देखने  लगी   .

शिखा  कौशिक  'नूतन '   

बुधवार, 4 सितंबर 2013

शत शत नमन सद्गुरु के चरणों में !


शत शत नमन   सद्गुरु  के  चरणों  में !
शत शत नमन   सद्गुरु  के  चरणों  में !

   सद्गुरु  के  चरणों  में हम शीश  धरते हैं ,
 श्रद्धा  अवनत  होकर   प्रणाम  करते   हैं .
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 आपने हरा अज्ञान  का है तम
पूजनीय हैं आप सर्वप्रथम
आपकी महिमा का गुणगान करते हैं
श्रद्धा अवनत होकर प्रणाम करते हैं .
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सत्य  का पथ आपने दिखाया
माया मोह के जाल से  बचाया    
करबद्ध  हो सम्मान करते हैं
श्रद्धा अवनत होकर प्रणाम करते हैं .
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पग पग पर आपने   किया निर्देशन  
अहर्निश हमारा किया मार्गदर्शन      
आप हैं महान विद्यादान करते हैं
श्रद्धा अवनत होकर प्रणाम करते हैं .
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आपको करते हैं शत शत नमन
आपने सँवारा  हमारा जीवन  
 आप जैसे  गुरु पर अभिमान करते हैं
 श्रद्धा अवनत होकर प्रणाम करते हैं .    
                            

  शिखा कौशिक

मंगलवार, 3 सितंबर 2013

रहन सहन एवं यौन अपराध व बलात्कार.......डा श्याम गुप्त ..




 





               If  this is the situation, this is the innovation & pretty pictures & the same is taught, told & displayed in schools ..colleges & their functions.. then forget that rapes & crimes will be controlled in country and society....

                 यदि यह  वस्तुस्थिति  एवं यही नवीनता, नवीन वैचारिकता है जिसे  स्कूलों, कालेजों में यह सिखाया, पढ़ाया, बताया एवं  दिखाने व कार्यक्रमों का भाग होता रहा तो आप भूल जाएँ कि देश व समाज में बलात्कार, यौन शोषण एवं स्त्रियों के प्रति अपराध कम होंगे .....

                                                                   ---     चित्र -- टाइम्स ऑफ़ इंडिया

रविवार, 1 सितंबर 2013

बेटियाँ कैसे बचेंगी


                                      बेटियाँ कैसे बचेंगी 


            समाचार पत्रों की सुर्खियाँ और मन में उठते हजार सवाल ………… कैसे सुरक्षित रहेंगी हमारी बेटियाँ ?
                 संतों की यह भूमि दागदार हो गयी एक संत के कारण , यदि हम मान भी ले कि ये साजिश हो तो भी सवाल ये है कि संत ने अकेले कमरे में लड़की का उपचार क्यों किया जबकि उनमे शक्ति है तो वे सबके सामने भी कर सकते थे । आशाराम बापू की आत्मा क्या स्वयं को नहीं धिक्कारती होगी जो ऐसे गुनाह उनके ऊपर लगे?
             सवाल ये नहीं है कि महान  संत पर आज इल्जाम लगा है , बल्कि ये है कि यदि उन्होंने गलती नहीं की है तो भागते क्यों है ? आत्मसर्पण कर समाज के सामने सच्चाई लाते, अपनी बेगुनाही का सबूत  देते ?
          पतन की ओर जाते हमारे समाज को पुनः  सभ्य बनाने जरुरत की  है। आज  हर घर को जगाने की जरुरत है , एक आदमी के कारण पुरे समाज को दोष नहीं दिया जा सकता लेकिन तेजी से बढ़ रही दुराचार की घटनाओं को नजरंदाज भी नहीं किया जा सकता। राह चलती लड़कियों को गिद्ध की दृष्टि से देखनेवालों की कमी नहीं है पर बेटियों की सुरक्षा सबसे अहम है। हमें जागना होगा, उन सभी जानवरों से सचेत रहना होगा जिनकी बदनीयती समाज में कलंक के रूप में उभर रही हैं। घर से लेकर बाहर तक राक्षस भरे पड़े हैं , ऐसे में उनसे बचना भी एक समस्या ही है फिर भी हमें सचेत होकर मुकाबला करना होगा।