बुधवार, 11 नवंबर 2015

''इस अमावस को बदल दें चांदनी की रात में ''


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इस बार दीपक वे जगें ,फैले उजाला प्यार का ,
अंत हो इस मुल्क में मज़हबी तकरार का !
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हो मिठाई से भी मीठा , मुंह से निकले बोल जो ,
ये ही मौका है मोहब्बत के खुले इक़रार का !
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इस अमावस को बदल दें चांदनी की रात में ,
तब मज़ा आएगा असली दीपों के त्यौहार का !
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नफ़रतें मिट जाएँ सारी , फिरकापरस्ती दफ़न हो ,
इस दीवाली काट देंगें सिर हर एक गद्दार का !
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अब दिलों में झिलमिलाएँ प्रेम से रोशन दिए ,
कारोबार ठप्प हो 'नूतन' नफरत-ए-बाजार का !

शिखा कौशिक 'नूतन'

6 टिप्‍पणियां:

yashoda Agrawal ने कहा…

दीप पर्व की शुभकामनाएँ ..आपकी लिखी रचना "पांच लिंकों का आनन्द में" गुरुवार 12 नवम्बबर 2015 को लिंक की जाएगी............... http://halchalwith5links.blogspot.in पर आप भी आइएगा ....धन्यवाद!

हिमकर श्याम ने कहा…

बहुत ख़ूब।

हिमकर श्याम ने कहा…

बहुत ख़ूब।

Kajal Kumar ने कहा…

सुंदर जी

Rushabh Shukla ने कहा…

सुन्दर रचना ......
मेरे ब्लॉग पर आपके आगमन की प्रतीक्षा है |

http://hindikavitamanch.blogspot.in/
http://kahaniyadilse.blogspot.in/

Jamshed Azmi ने कहा…

बहुत ही सुंदर रचना की प्रस्‍तुति।