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शनिवार, 31 अगस्त 2013
शुक्रवार, 30 अगस्त 2013
कौन करेगा गर्व भला भारत की ऐसी नारी पर !!
| कौन करेगा गर्व भला भारत की ऐसी नारी पर !! |
नारी मुझको रोना आता तेरी इस लाचारी पर ,
कौन करेगा गर्व भला भारत की ऐसी नारी पर !!
कोख में कन्या-भ्रूण है सुनकर मिलता आदेश मिटाने का ,
विद्रोह नहीं क्यूँ तू करती ?क्यूँ ममता तेरी जाती मर !!
कौन करेगा गर्व भला भारत की ऐसी नारी पर !!
दुल्हन बनकर जो आती है वो भी तो तेरी बेटी सम ,
जब आग में झोंकी जाती है क्यूँ नहीं रोकती तू बढ़कर !!
कौन करेगा गर्व भला भारत की ऐसी नारी पर !!
बेटा-बेटी में भेद बड़ा तू भी तो करने लगती है ,
बेटी को डांट पिलाकर के बेटा लेती बाँहों में भर !!
कौन करेगा गर्व भला भारत की ऐसी नारी पर !!
कर सकती है तो इतना कर ये सोच बदल दकियानूसी ,
दोनों फूलों से है उपवन बेटा-बेटी दोनों सुन्दर !
कौन करेगा गर्व भला भारत की ऐसी नारी पर !!
शिखा कौशिक 'नूतन '
मंगलवार, 27 अगस्त 2013
श्री कृष्ण जन्म अष्टमी पर शुभकामनाएं |
श्री कृष्ण जन्म अष्टमी पर शुभकामनाएं |
जसोदा तेरा लल्ला कितना सलोना है ,
पालने में झूलता चंदा सा खिलौना .
कान्हा को बाँहों का झूला झुलाएंगे ,
मीठी मीठी लोरी सुनाकर सुलायेंगें ,
ममता की बरखा से उसको भिगोना है .
जसोदा तेरा लल्ला ....
ले गोद कान्हा को गोकुल घुमाएंगे ,
गैय्या दिखाएंगें उपवन घुमायेंगें ,
मखमल सा कोमल ये गोकुल का छौना है .
जसोदा तेरा लल्ला .....
कब लब होंगे आज़ाद कब लेंगें खुलकर साँस ?
कब लब होंगे आज़ाद कब लेंगें खुलकर साँस ?
शोषित पीड़ित नारी ये सोच रही है आज !
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कब तक बनकर सीता अग्नि परीक्षा देंगी ?
कब तक शुचिता -प्रमाणन की आज्ञा पूर्ण करेंगी ?
कब मूक कंठ से अपने भी निकलेगी आवाज़ ?
शोषित पीड़ित नारी ये सोच रही है आज !
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कब तक वस्तु की भाँति इसको दाँव लगाओगे ,
चीर -हरण करवाकर लज्जित करवाओगे ,
फूल सी देह के भीतर कब दिल होगा फौलाद !
शोषित पीड़ित नारी ये सोच रही है आज !
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कब तक बेटी के होने पर शोक मनाओगे ,
तुम दहेज़ की खातिर उसको आग लगाओगे ,
कभी तो दुर्गा बनकर वो भी देगी गर्दन काट !
शोषित पीड़ित नारी ये सोच रही है आज !
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इंद्र छल का फल कब तक भोगे अहिल्या ,
दुष्यंत के धोखे में क्यों आती हैं शकुन्तला ,
कब भावों पर बुद्धि कर पायेगी राज !
शोषित पीड़ित नारी ये सोच रही है आज !
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चूड़ी ,बिंदी ,बिछुआ ,सिन्दूर के श्रृंगार ,
पति तो रुतबे वाली पति ही जीवन का आधार ,
कब पति करेंगें पत्नी -हित कोई उपवास !
शोषित पीड़ित नारी ये सोच रही है आज !
शिखा कौशिक 'नूतन '
शुक्रवार, 23 अगस्त 2013
मानव तुम ना हुए सभ्य
आज भी कई
होते चीरहरण
कहाँ हो कृष्ण
***
रही चीखती
क्यों नहीं कोई आया
उसे बचाने
***
निर्ममता से
तार-तार इज्ज़त
करें वहशी
***
हुआ वहशी
खो दी इंसानियत
क्यों आदमी ने
***
तमाम भय
असुरक्षित हम
कैसा विकास
***
कैसी ये व्यथा
क्यों रहे जानवर
पढ़-लिख के
***
वामा होने की
कितनी ही दामिनी
भोगतीं सज़ा
***
बेबस नारी
अजीब-सा माहौल
कैसा मखौल
***
ओ रे मानव
कई युग बदले
हुआ ना सभ्य
***
Dr. Sarika Mukesh
http://hindihaiku.blogspot.com
बुधवार, 21 अगस्त 2013
श्याम स्मृति...स्त्री-शिक्षा व शोषण-चक्र ....डा श्याम गुप्त ...
स्त्री-शिक्षा व शोषण-चक्र
....
यदि शिक्षा व स्त्री-शिक्षा के इतने प्रचार-प्रसार के पश्चात् भी शोषण व उत्प्रीणन जारी रहे तो क्या लाभ ? हमें बातें नहीं, कर्म पर विश्वास करना चाहिए, परन्तु यथातथ्य विचारोपरांत । यह
शोषण-उत्प्रीणन चक्र अब रुकना ही चाहिए । पर जब तक नारी स्वयं आगे नहीं आयेगी, क्या होगा, कुछ
नहीं ? नारी-शोषण में कुछ नारियां ही तो भूमिका में होती हैं । आखिर हीरोइनों को कौन विवश करता है
अर्धनग्न नृत्य के लिए ? चंद पैसे ही न । क्या कमाई का यह ज़रिया वैश्यावृत्ति का नया अवतार नहीं कहा
जा सकता ।
आखिर नारी क्या चाहती है ? नारी स्वातंत्र्य का क्या अर्थ हो ? मेरे विचार में स्त्री को भी पुरुषों
की भाँति सभी कार्यों की छूट होनी चाहिए । हाँ, साथ ही सामाजिक मर्यादाएं, शास्त्र मर्यादाएं व स्वयं स्त्री
सुलभ मर्यादाओं की रक्षा करते हुए स्वतंत्र जीवन का उपभोग करें । आखिर पुरुष भी तो स्वतंत्र है, परन्तु
शास्त्रीय, सामाजिक व पुरुषोचि मर्यादा निभाये बगैर समाज उसे भी कब आदर देता है । वही स्त्री के लिए भी
है । भारतीय समाज में प्राणी मात्र के लिए सभी स्वतन्त्रता सदा से ही हैं । हाँ, गलत लोग, गलत स्त्री तो हर
समाज में सदा से होते आये हैं व रहेंगे । इससे सामाजिक संरचना थोड़े ही बुरी होजाती है । अतः उसे कोसा
जाय , यह ठीक नहीं । और 'समाज को बदल डालो' यह नारा ही अनुचित है अपितु 'स्वयं को बदलो ' नारा
होना चाहिए । यही एकमात्र उपाय है आपसी समन्वय का एवं स्त्री-पुरुष, समाज-राष्ट्र व विश्व-मानवता की
भलाई व उन्नति का |
रविवार, 18 अगस्त 2013
बेटी पराई -लघु कथा
| बेटी पराई -लघु कथा |
शिखा कौशिक 'नूतन '
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