सोमवार, 29 जुलाई 2019

ट्रिपल तलक आस्था नही, अधिकारों की लड़ाई है ।


ट्रिपल तलक  आस्था नही, अधिकारों की लड़ाई है ।
ट्रिपल तलाक पर रोक लगाने का बिल लोकसभा से तीसरी बार पारित होने के बाद  एक बार फिर चर्चा में है। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने 2017 में ही इसे असंवैधानिक करार दे दिया था लेकिन इसे एक कानून का रूप लेने के लिए अभी और कितना इंतज़ार करना होगा यह तो समय ही बताएगा। क्योंकि बीजेपी सरकार भले ही अकेले अपने दम पर  इस बिल को लोकसभा में  82 के मुकाबले 303 वोटों से पास कराने में आसानी से सफल हो गई हो लेकिन इस बिल के प्रति विपक्षी दलों के रवैये को देखते हुए इसे राज्यसभा से  पास कराना ही उसके लिए असली चुनौती है। यह वाकई में समझ से परे है कि कांग्रेस समेत समूचा विपक्ष अपनी गलतियों से कुछ भी सीखने को तैयार क्यों नहीं है। अपनी वोटबैंक की राजनीति की एकतरफा सोच में  विपक्षी दल इतने अंधे हो गए हैं कि  यह भी नहीं देख पा रहे कि उनके इस रवैये से उनका दोहरा आचरण ही देश के सामने आ रहा है। क्योंकि जो विपक्षी दल राम मंदिर और सबरीमाला जैसे मुद्दों पर यह कहते हैं कि उन्हें सुप्रीम कोर्ट पर पूरा भरोसा है और उसके फैसले को स्वीकार करने की बातें करते हैं वो ट्रिपल तलाक पर उसी सुप्रीम कोर्ट के फैसले के विरुद्ध खड़े हो कर उसे चुनौती दे रहे हैं। 
दरअसल ट्रिपल तलाक जैसा मुद्दा जो एक स्त्री के जीवन की नींव को पल भर में हिला दे, उसकी हंसती खेलती गृहस्थी को पल भर में उजाड़ दे, उसे संभलने का एक भी मौका दिए बिना उसके सपनों को क्षण भर में रौंद दे, ऐसे मुद्दे पर राजनीति होनी ही नहीं चाहिए। क्योंकि न तो यह कोई मजहबी चश्मे से देखने वाला मुद्दा है और ना ही राजनैतिक नफा नुकसान की नज़र से। लेकिन दुर्भाग्य की बात है कि आज इस मुद्दे पर विपक्ष ओछी राजनीति के अलावा और कुछ नहीं कर रहा। कारण, इस बिल की सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इस बिल में "तलाक" को नहीं केवल तलाक के एक अमानवीय तरीके, "ट्रिपल तलाक" को ही कानून के दायरे में लाया जा रहा है। जाहिर है इससे पुरुषों का तलाक देने का अधिकार खत्म नहीं हो रहा बल्कि समुदाय विशेष की स्त्रियों के हितों की  रक्षा करने का प्रयास किया जा रहा है इसलिए इसे "मुस्लिम महिला विवाह अधिकार संरक्षण विधेयक" नाम दिया गया। इतना ही नहीं, इस्लाम में 9 तरीकों से तलाक दिया जा सकता है। तो अगर उसमें से एक तरीका कम कर भी दिया जाए तो तलाक देने के आठ अन्य तरीके फिर भी शेष हैं, तो इसका इतना विरोध क्यों? खास तौर पर तब जब कुरान में "तलाक ए बिद्दत" यानी तीन तलाक का स्पष्ट संहिताकरण नहीं किया गया हो बल्कि उलेमाओं द्वारा इसकी मनमाफिक व्याख्या की जाती रही हो। दरअसल मुल्ला मौलवियों की मिली भगत से ट्रिपल तलाक और फिर उसके बाद हलाला जैसी   कुप्रथाओं ने समय के साथ एक ईश्वरीय रूप ले लिया और पाक कुरान के प्रति आस्था के नाम पर मजहबी भय का माहौल बन गया जिससे अज्ञानतावश लोग इसका विरोध करने की हिम्मत नहीं जुटा पाए। अपने फैसले में न्यायालय ने भी यह स्पष्ट कहा है कि "तलाक-ए- बिद्दत"  इस्लाम का अभिन्न अंग नहीं है इसलिए इसे अनुच्छेद 25 के तहत धार्मिक स्वतंत्रता के अधिकार का सरंक्षण प्राप्त नहीं हो सकता। इसके साथ ही न्यायालय ने शरीयत कानून 1937 की धारा 2 में दी गई एक बार में तीन तलाक की मान्यता को भी रद्द कर दिया। शिया वक्फ बोर्ड के चेयरमैन वसीम रिज़वी का भी कहना है कि ट्रिपल तलाक का किसी मजहब या कुरान से कोई वास्ता नहीं है। इसके बावजूद कुछ राजनैतिक दलों द्वारा मजहबी आस्था के नाम पर तीन तलाक का विरोध साबित करता है कि यह वोटबैंक की राजनीति के अलावा और कुछ नहीं है क्योंकि यह आस्था नहीं अधिकारों का मामला है। 
क्योंकि निकाह इस्लाम में दो लोगों के बीच एक कॉन्ट्रैक्ट जरूर है लेकिन जब इसमें स्त्री और पुरूष दोनों की रजामंदी जरूरी होती है तो इस कॉन्ट्रैक्ट से अलग होने का फैसला एक अकेला कैसे ले सकता है? जब यह कॉन्ट्रैक्ट यानी  निकाह अकेले में नहीं किया जा सकता, दो गवाह और एक वकील की मौजूदगी जरूरी होती है तो इस कॉन्ट्रैक्ट का अंत यानी तलाक  अकेले में ( कभी कभी तो पत्नी को भी नहीं पता होता)  या व्हाट्सएप पर या फ़ेसबुक पर बिना गवाह और वकील के कैसे जायज हो सकता है? और जो मजहब के नाम पर इसे जायज ठहरा भी रहे हैं क्या वो यह बताने का कष्ट करेंगे कि दुनिया का कौन सा  मजहब आस्था के नाम पर किसी  मनुष्य तो छोड़िए किसी अन्य जीव  के प्रति असंवेदनशील होने की सीख  देता हैवैसे भी दुनिया के 20 इस्लामिक मुल्कों में ट्रिपल तलाक पूर्णतः प्रतिबंधित है।लेकिन ओवैसी जी का कहना है कि हमें इस्लामिक मुल्कों से मत मिलाइए नहीं तो कट्टरपंथ को बढ़ावा मिलेगा। तो अगर वे वाकई में कट्टरपंथ के खिलाफ हैं तो उन्हें भारत के मुसलमानों को मुस्लिम पर्सनल लॉ  को त्याग कर पूर्ण रूप से भारत के संविधान को ही मानने के लिए प्रेरित करना चाहिए। इससे भारत में कट्टरपंथ की जड़ ही खत्म हो जाएगी। सच तो यह है कि ये राजनैतिक दल अगर स्वार्थ नहीं देश हित  की राजनीति कर रहे होते तो जो  लड़ाई 1978 में शाहबानों ने शुरू की थी वो 2019 तक जारी नहीं रहती। रही बात इसे एक क्रिमिनल ऑफ्फेन्स यानी आपराध की श्रेणी में लाने की, तो जनाब,
कत्ल केवल वो नहीं होता जो खंजर  से किया जाए और 
ज़ख्म केवल वो नहीं होते जो जिस्म के लहू  को बहाए,
कातिल वो भी होता है जो लफ़्ज़ों के तीर चलाए और
ज़ख्म वो भी होते हैं जो रूह का नासूर बन जाए।
जो तीन शब्द एक हंसती खेलती ख्वातीन को पलभर में एक जिंदा लाश में तब्दील कर दें उनका इस्तेमाल करने वाला शख्स यकीनन सज़ा का हकदार होना चाहिए।
डॉ नीलम महेंद्र


http://www.media.ind.in/triple-talaq.html

गुरुवार, 25 जुलाई 2019

सांसद या गुंडे?

ये किसी प्रेस कॉन्फ्रेंस में नहीं  कहा गया. ये किसी रागिनी के मंच पर भी नहीं कहा गया. ये किसी फिल्मी कार्यक्रम में भी नहीं कहा गया. ये किसी मसखरे, नचनचिये, नादान, बावले व्यक्ति ने नहीं कहा. ये कहा है भारतीय जनता के प्रतिनिधि आजम खां साहब? ने पवित्रता व मर्यादा की मिसाल भारतीय संसद में. किसी अभिनेत्री, नृत्यांगना के प्रति नहीं वरन् महिला सांसद के प्रति. क्या संदेश जाता है? संसद तक में सशक्त नारी के साथ ऐसा व्यवहार किया जा रहा है तब गली मोहल्ले के शोहदों पर क्या लगाम कसेगी! लोकसभा अध्यक्ष महोदय को तुरंत आजम खां जैसे बीमार सांसदों को लोकसभा से निष्कासित कर देना चाहिए.
-डॉ शिखा कौशिक नूतन 

सोमवार, 10 जून 2019

केवल एक मांग - फांसी दो

वास्तव में ट्विंकल जैसी कलियों का दुष्टों द्वारा नोंचा जाना हमारे पूरे सामाजिक व प्रशासनिक संगठन पर एक चुभता प्रश्नचिन्ह है. विभत्सता की पराकाष्ठा है ये. जिन उम्मीदों के साथ उत्तर प्रदेश सरकार चुनी गई थी, वे उम्मीदें मिट्टी में मिल रही हैं. जनता एक सुरक्षित वातावरण चाहती है ताकि भविष्य में ऐसी दुर्घटना घटित न हो. ट्विंकल के पिता ने मुख्यमंत्री जी से भेंट न करने का निर्णय लेकर साफ संदेश दिया है कि मात्र नवरात्रि में कन्या पूजन कर प्रदेश की बेटियों के प्रति आपका उत्तरदायित्व पूर्ण नहीं हो जाता है. दोषियों को सजा मिले व भविष्य में ऐसी कोई घटना घटित न हो, इसके लिए भी प्रदेश सरकार को दृढ़ता के साथ संकल्पित होने की आवश्यकता है.
-डॉ शिखा कौशिक नूतन

मंगलवार, 21 मई 2019

ये कैसा विवेक!!!

अपने नाम के विपरीत अभिनेता जी  नारी के प्रति आपकी अभद्र सोच उजागर हो चुकी है. ऐतराज किये जाने पर ट्वीट डिलीट करने से आप पाक साफ नहीं हो जाते. नारी सशक्तिकरण पर जोर शोर से भाषण देने वालों की अमूमन ये ही स्थिति है. होंठों पर कमल और दिल में कीचड़




. -डॉ शिखा कौशिक नूतन 

शुक्रवार, 8 मार्च 2019

भारतीय नारी ब्लॉग प्रतियोगिता - 6 का परिणाम

अन्तरराष्ट्रीय महिला दिवस की हार्दिक बधाई व शुभकामनाएँ.


भारतीय नारी ब्लॉग प्रतियोगिता - 6 में हमें अनेक प्रविष्टियां प्राप्त हुई हैं. सभी की नारी को लेकर भावनाओं व विचारों को सलाम. सभी को प्रदान की जा रही है साहित्यिक पुस्तकें पुरस्कार स्वरूप.
1 - आदर्श व्यक्तित्व वह होता है जो हमारे जीवन पर न केवल प्रभाव छोड़ता है वरन् हमारे जीवन को एक दिशा भी प्रदान करता है. मेरी आदर्श है भारतीय सेनाओं में शामिल होकर देश की रक्षा करने वाली वीरांगनायें. वे मुझे प्रेरणा प्रदान करती हैं. मुझे उन पर गर्व है - सुश्री सोनाक्षी गौड़, देहरादून.

2-हमारा भारतीय समाज पुरूष प्रधान समाज है. इसमें जब भी कोई स्त्री चौखट लांघकर बाहर निकलती है तब उसे परिवार के साथ समाज के विरोध का भी सामना करना पड़ता है. मेरी मौसी जी ने शादी के तीन साल बाद अपने अत्याचारी पति से तलाक लिया और अपने बल पर अपनी दो वर्षीय बेटी को उच्च शिक्षा दिलवाई. आज उनकी बेटी राजकीय इंटर कॉलेज में प्रवक्ता पद पर कार्यरत है और अपनी सफलता का श्रेय मौसी जी को देती है. वास्तव में मौसी जी उसकी ही नहीं, हम सभी की आदर्श नारी हैं. - डॉ सरोजिनी खन्ना, कुरूक्षेत्र, हरियाणा.

3-मां से बढ़कर हमारी लाइफ में कोई आदर्श नहीं होता है. मां असीम कष्टों को झेलकर हमें जन्म देती है, अपना सब सुख चैन हम पर न्यौछावर कर देती है. हम पर संकट आया हुआ देखकर वो भी अपने पर ले लेती है. मुझे भी मेरी मां से बढ़कर कोई और नारी आदर्श नहीं दिखाई देती है. मां ने बचपन से ही हमें सिखाया कि कभी किसी का दिल मत दुखाओ, किसी का मजाक मत उड़ाओ. वास्तव में मैं भगवान का शुक्रिया अदा करता हूँ कि उन्होंने मुझे इतनी अच्छी मां की कोख से मुझे जन्म दिलवाया. - डॉ राजेंद्र कुमार, ऋषिकोंडा, विशाखापत्तनम.

4-भारत की एकमात्र महिला प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी जी मेरी दृष्टि में सबसे आदर्श नारी हैं. बचपन में वानर सेना बनाकर देश की आजादी के आंदोलन में शामिल हुई इंदिरा गांधी ने कहा था कि - मेरे खून का एक एक कतरा देश के काम आयेगा और वास्तव में यह साबित भी हुआ. मैं उन्हें सादर नमन करती हूँ - सुश्री पूजा सिंघल, कल्याण नगर, मेरठ.

सभी प्रतिभागियों को भारतीय नारी ब्लॉग परिवार की ओर से हार्दिक बधाई व शुभकामनाएँ. 

गुरुवार, 7 मार्च 2019

नारी शक्ति को समर्पित गुरुवासरीय काव्य गोष्ठी संपन्न --डा श्याम गुप्त

नारी शक्ति को समर्पित

गुरुवासरीय काव्य गोष्ठी संपन्न 
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प्रत्येक माह के प्रथम गुरूवार को होने वाली गुरुवासरीय काव्यगोष्ठी दिनांक ७ मार्च २०१९ गुरूवार को डा श्यामगुप्त के आवास सुश्यानिदी, के-३४८, आशियाना , लखनऊ पर संपन्न हुई |
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डा श्यामगुप्त ने माँ सरस्वती वन्दना प्रस्तुत करते हुए पढ़ा---

हे मातु ! विद्या बुद्धि ज्ञान प्रीति गुण प्रदायकं|
अज्ञान अन्धकार त्रिविधि ताप शान्ति दायकं |
हों कथ्य तथ्य सत्य मातु असत भाव नाशकं |
स्वर हों समाज राष्ट्र हित, भजाम्यहं भजाम्यहं ||
------एवं शहीदों को नमन गीत भी प्रस्तुत किया---
हैं नमन भारत देश को है शौर्य जिसकी हवाओं में,
नमन है उन सैनिकों को देश का सम्मान रख्खा |
आज अपने शौर्य से सारे जगत में छागये,
चालीस के बदले चार सौ मार कर जो आगये ||
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-----प्रथम सत्र में साहित्यकारों का सम्मान भी किया गया | लखनऊ पुस्तक-मेला संयोजक श्री देवराज अरोड़ा को भी सम्मानित किया गया |
----- अनिल किशोर शुक्ल ने अपनी रचना में कहा---
सोच समझ कर हर दम बोलो,
शब्द ब्रह्म है इसको तोलो |
------उमेश चन्द्र श्रीवास्तव ने भोले शंकर की महिमा में गायन किया एवं श्रीमती पुष्पा गुप्ता ने दर्पण में अपनी परछाईं से बात करते हुए कहा—
अस्फुट निगाहें दर्पण से झांकीं
परछाईं हमारी हम से यूं पूछ बैठी |
------श्री रामप्रकाश राम ने सुन्दर छंदों में श्रीकृष्ण की छवि को प्रस्तुत किया प्रस्तुत किया—
अंग अंग भूषण विराजें साजे वनमाल,
कमल नयन कमनीय तन श्याम हैं |
-------श्रीमती विजय लक्ष्मी महक ने महिला-दिवस का झंडा उठाते हुए कहा—
महिला दिवस है यह महिला दिवस है |
न मर्जी से खा सकती न मर्जी से पी सकती<
क्योंकि महिला दिवस है महिला दिवस है |
------ श्री बिनोद कुमार सिन्हा जी ने मधुत्सव प्रस्तुत करते हुए कहा ---
हुआ आगाज प्रिय वसंत का,
पुलकित वसुंधरा हुई मगन,
कुसुमित पल्लवित वन उपवन |
----- श्रीमती मधु दीक्षित जी ने एक सुन्दर गीत रचना प्रस्तुत की----
विकल आँखों में कटी रजनी के आँचल को उठाकर,
जागते जो नव अरुण से, कौन हो तुम !
------ कविवर अखिलेश जी ने एक गीत प्रस्तुत किया---
जाने कितनी देर लगा दी तुमने आने में |
अब तो स्वांस स्वांस का चलना ख़तम खजाने में |
------- श्रीमती सुषमा गुप्ता ने महिला सशक्तीकरण गीत प्रस्तुत करते हुए गाया---
तुम पुरुष अहं के हो सुमेरु
मैं नारी आन की प्रतिमा हूँ |
तुम पुरुष दंभ के परिचायक,
मैं सहज मान की गरिमा हूँ |
------- साहित्यभूषण डा रंगनाथ मिश्र सत्य ने एक श्रृंगार गीत प्रस्तुत करते एक पत्नी की इच्छा को बताया—
अबकी चुनाव लड़ि जाव मोरे संइयाँ,
अबकी विधायक बनि जाव मोरे संइयाँ |
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संक्षिप्त जलपान एवं धन्यवाद ज्ञापन के उपरांत सभा को स्थगित किया गया |

बुधवार, 27 फ़रवरी 2019

अब न ठहर पाऊंगा'--नज़्म ---डा श्याम गुप्त




----एक वीर,सैनिक जब युद्ध पर जाता है तो उसके उदगार क्या होते हैं देखिये -----श्रृंगार रस में शौर्य , वीर रस की उत्पत्ति ----प्रस्तुत है एक नज़्म----'अब न ठहर पाऊंगा'---
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